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देह का सुकून देता हैदेहरादून

पर्यटन

देह का सुकून देता हैदेहरादून

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उत्तराखंड की राजधानी देहरादून शिवालिक पहाड़ियों में बसा एक बहुत ही खूबसूरत शहर है। घाटी में बसे होने के कारण इसको दून घाटी भी कहा जाता है। देहरादून में दिन का तापमान मैदानी इलाके सा होता है पर शाम ढलते ही यहां का तापमान कम हो जाता है। देहरादून के पूर्व और पश्चिम में गंगा-यमुना नदियां बहती हैं, इसके उत्तर में हिमालय और दक्षिण में शिवालिक पहाड़ियां हैं। शहर को छोड़ते ही जंगल का हिस्सा शुरू हो जाता है, यहां पर वन्यप्राणियों को भी देखा जा सकता है। देहरादून प्राकृतिक सौंदर्य के अलावा शिक्षा संस्थानों के लिए भी प्रसिद्ध है, यहां के स्कूलों में भारतीय सैन्य अकादमी, दून स्कूल और ब्राउन स्कूल प्रमुख हैं।

 

 

दर्शनीय स्थल

सहस्रधारा देहरादून में घूमने के लिए कई जगहें हैं, जो यहां आता है वह मसूरी जरूर घूमने जाता है। घूमने के हिसाब से देखें तो सहस्रधारा सब से करीब की जगह है, सहस्रधारा गंधक के पानी का प्राकृतिक स्रोत है। देहरादून से इस की दूरी 14 किलोमीटर है, जंगल से घिरे इस इलाके में बालदी नदी में गंधक का स्रोत है। इसका पानी भर कर लोग घरों में ले जाते हैं, कहते हैं कि गंधक का पानी त्वचा की बीमारियों को दूर करने में सहायक होता है।


गुच्चू पानी

सहस्रधारा के बाद गुच्चू पानी नामक जगह भी देखने लायक है, यह शहर से 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। गुच्चू पानी जलधारा है, इसका पानी गर्मियों में ठंडा और जाड़ों में गरम रहता है। गुच्चू पानी आने वाले लोग अनारावाला गांव तक कार या बस से आते हैं।

खलंग स्मारक

देहरादून से सहस्रधारा जाने वाले रास्ते के बीच ही खलंग स्मारक बना हुआ है। यह अंग्रेजों और गोरखा सिपाहियों के बीच हुए युद्ध का गवाह है।

चंद्रबदनी देहरादून

दिल्ली मार्ग पर बना चंद्रबदनी एक बहुत ही सुंदर स्थान है। देहरादून से इस की दूरी 7 किलोमीटर है। यह जगह चारों ओर पहाड़ियों से घिरी हुई है। यहां पर एक पानी का कुंड भी है, अपने सौंदर्य के लिए ही इस का नाम चंद्रबदनी पड़ गया है।

लच्छीवाला

देहरादून से 15 किलोमीटर दूर जंगलों के बीच बसी इस खूबसूरत जगह को लच्छीवाला के नाम से जाना जाता है। जंगल में बहती नदी के किनारे होने के कारण यहां पर लोग घूमने जरूर आते हैं।

कालसी देहरादून- चकराता रोड पर 50 किलोमीटर की दूरी पर कालसी स्थित है। यहां पर सम्राट अशोक का प्राचीन शिलालेख देखने को मिल जाता हैं, यह लेख पत्थर की बड़ी शिला पर पाली भाषा में लिखा है, पत्थर की शिला पर जब पानी डाला जाता है तभी यह दिखाई देता है। चीला वन्यजीव संरक्षण उद्यान गंगा नदी के पूर्वी किनारे पर वन्यजीवों के संरक्षण के लिए 1977 में चीला वन्य संरक्षण उद्यान बनाया गया था। यहां पर हाथी, टाइगर और भालू जैसे तमाम वन्य जीव पाए जाते हैं। नवम्बर से जून का समय यहां घूमने के लिए सब से उचित रहता है, देहरादून से यहां आने के लिए अपने साधन का प्रयोग करना पड़ता है।

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