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हिंदुओं को चुन-चुन कर मारा रोहिंग्या आतंकवादियों ने

निंदनीय

हिंदुओं को चुन-चुन कर मारा रोहिंग्या आतंकवादियों ने

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भारत में भले ही कथित धर्मनिरपेक्षतावादी प्राण-पण से रोहिंग्या शरणार्थियों को बचाने की जुगत में लगे हुए हैं और प्रियंका चोपड़ा कश्मीर के विस्थापितों को छोड़कर रोहिंग्या कैंप में स्कार्फ पहनकर अपनी खोखली और ग्लैमर भरी, फैशनेबल झूठी सहानुभूति प्रकट कर आई हों, लेकिन म्यांमार के रोहिंग्या बहुल इलाकों से आ रही खबरें विचलित करती हैं।

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने पाया है कि अगस्त 2017 में रोहिंग्या आतंकवादियों ने रोहिंग्या बहुल इलाकों में जमकर कत्लेआम किया, जिसके चलते कई हिंदू पुरुष और बच्चे मारे गए। इस कत्लेआम में सुनियोजित तरीके से महिलाओं को नहीं मारा गया बल्कि उन्हें बलात्कार के बाद जबरन धर्मांतरण के लिए विवश किया गया। यह जानकारी किसी भारतीय दक्षिणपंथी समाचार पत्रा ने नहीं बल्कि एमनेस्टी इंटरनेशनल ने दी है। जिसे सारी दुनिया में धर्मनिरपेक्ष संस्था का खिताब हासिल है।

एमनेस्टी के अनुसार कई ऐसी सामूहिक कब्र मिली हैं जिनमें कम से कम 53 हिंदुओं को मारकर दफनाया गया था।


मृतकों में ज्यादातर बच्चे भी शामिल थे। यह कत्लेआम अराकान रोहिंग्या साल्वेशन आर्मी ने अंजाम दिया। एमनेस्टी की रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि म्यांमार की सेना ने उस क्षेत्रा में ज़्यादती की थी लेकिन उन ज्यादतियों का बदला निर्दोष और कम संख्या में पाए जाने वाले हिंदुओं से लिया गया। उन्हें बड़ी संख्या में मार डाला गया और फिर सामूहिक कब्र बनाकर दफना दिया गया।

आज भारत देश में कुछ धर्मनिरपेक्षतावादी इन रोहिंग्या को बसाने के लिए आंदोलन कर रहे हैं। सरकार पर दबाव बना रहे हैं। लेकिन इन रोहिंग्या आतंकवादियों की करतूत से इनका कोई वास्ता नहीं है। अभी हाल ही में इंटेलिजेंस रिपोर्ट ने खुलासा किया है कि देश में कई दंगों में रोहिंग्या का हाथ है। धर्मनिर्पेक्षतावादियों को समझना चाहिए कि यह रोहिंग्या विदेशी हैं, भारत के नहीं हैं। इनका मूल देश बांग्लादेश है। जहां से 300 वर्ष पहले यह म्यांमार गए थे।

लेकिन वहां पर उन्होंने इतना उत्पात मचाया कि स्थानीय जनसंख्या इन्हें घृणा की दष्टि से देखती है। इसी कारण 3 लाख से अधिक रोहिंग्या को वहां से खदेड़ दिया गया है। इसका मतलब यह नहीं है कि भारत जिसकी जनसंख्या पहले से ही बहुत अधिक बढ़ चुकी है, इन रोहिंग्या मुसलमानों को शरण देकर अपनी समस्या बढ़ाए। भारत में मुसलमानों का एक वर्ग परिवार नियोजन नहीं अपनाने के कारण बड़ी संख्या में बेरोजगारी और भुखमरी का शिकार है। जिसके चलते उनमें से कुछ नौजवानों के कदम आतंकवाद की तरफ बढ़ रहे हैं। कई नौजवान आईएस जैसे संगठनों में भर्ती हो चुके हैं। ऐसी स्थिति में म्यांमार से इन धर्मांध मुसलमानों का आगमन भारत के लिए खतरा पैदा कर सकता है। मुद्दे की बात यह भी है कि दुनिया के 56 मुस्लिम देशों में से बांग्लादेश को छोड़कर किसी भी मुस्लिम देश ने इन मुसलमानों को शरण नहीं दी है। पाकिस्तान ने भी साफ मना कर दिया। ऐसी स्थिति में रोहिंग्या को शरण देना भारत के लिए भारी न पड़ जाए।

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