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चाहिए केवल सराहना के दो बोल – किरण बाला

घर-आंगन

चाहिए केवल सराहना के दो बोल – किरण बाला

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प्रत्येक पत्नी चाहती है कि वह अपने कार्य और व्यवहार से पति को संतुष्ट रखे और इसके लिए वह लाख जतन करती है लेकिन पति है कि उसके गुणों और कार्यों को कोई तवज्जो नहीं देते। ऐसे में पत्नी को बहुत तकलीफ होती है। कई पति अपने में ही खोये रहते हैं और पत्नी के कार्यों की ओर ध्यान ही नहीं देते। कुछ पति ऐसे भी होते हैं जिनके पास पत्नी की सराहना करने के लिए कोई शब्द नहीं होते वे मन ही मन उसके कार्य, व्यवहार से खुश तो होते हैं लेकिन अपनी प्रसन्नता का प्रदर्शन नहीं कर पाते।

इसके विपरीत उन पतियों की भी कमी नहीं हैं जो यह मानते हैं कि पत्नी के गुणों की तारीफ करने से वह सिर चढ़ जाएगी या उनका अपना मान घट जाएगा। इसलिए जानबूझकर चुप्पी साधे रहते हैं। यदि बोलते भी हैं तो इस तरह जैसे वे पत्नी को कुछ समझते ही नहीं। जो कुछ भी हैं वे ही हैं।

यदि सब्जी मंे नमक कम-ज्यादा हो जाए या रोटी जल जाए या भोजन मनपसंद न बने या चाय में शक्कर कम-ज्यादा हो जाए, तो पत्नी को प्रताड़ित करते पति नहीं थकते लेकिन उसी पत्नी के हाथों बने स्वादिष्ट व्यंजनों को चटखारे लेकर खाते हैं पर मुखारविंद से प्रशंसा के दो बोल नहीं फूटते। पत्नी हर तरह से पति को खुश देखना चाहती है और इसके लिए वह तन-मन से जुटी रहती है लेकिन पति उसकी भावनाओं की कद्र नहीं कर पाते। वह अपने पति के लिए सजती-संवरती है। पलक पांवड़े बिछाकर प्रतीक्षा करती है। मजाल है पति उसके प्रति कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त कर दें। परिणाम पत्नी की आशाओं पर तुषारापात। जरा पति अपनी पत्नी की खूबसूरती की तारीफ तो करके देखे, वह फूली नहीं समाएगी। झूठी तारीफ न सही पर यदि हकीकत में वह आकर्षक लग रही है, तो उसकी प्रशंसा करने में कंजूसी क्यों?
हर पत्नी की चाहत होती है कि पति उसके रूप सौंदर्य, गुणों, कार्यो व व्यवहार की तारीफ करे, उसे सराहे। यदि पति ऐसा करते हैं, तो पत्नी को दिली खुशी होती है। पति से सराहना मिलने पर उसकी सारी थकान और तनाव पलभर में दूर हो जाता है। मान लीजिए उसने बड़ी मेहनत से गृह-सज्जा की है और पति उसकी इस निपुणता की तारीफ कर दे, तो उसे उसकी मेहनत का फल मिल जाता है। यदि उसने कोई व्यंजन बनाया है और पति उसकी भूरि-भूरि प्रशंसा करे, तो पत्नी की खुशी का ठिकाना नहीं रहेगा।

इसी प्रकार यदि पत्नी ने बड़े मन से पति के लिए स्वेटर तैयार किया है और जिसे पहनकर पति उनकी कला, दक्षता को सराहे, तो उसे मन में एक सुकून मिलता है। इसी तरह यदि वह अच्छी पेंटिंग बनाती है या अच्छी कहानी, कविता, लेख आदि लिखती है तो उसकी तारीफ करके उसे प्रोत्साहित करना पति का कर्तव्य है। प्रशंसा करना, उसे प्रोत्साहित करने का सबसे बढ़िया तरीका है। इससे पत्नी की प्रतिभा तो निखरती ही है, उसकी नजर में पति की इज्जत भी बढ़ती है। पत्नी की प्रशंसा करने का मतलब यह नहीं कि उसमें अतिशयोक्ति की जाए। सही अर्थों में प्रशंसा वही होती है जो नपे-तुले शब्दों में की गई हो। आप करके देखें, परिणाम बहुत बेहतर होंगे।

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