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केवल शारीरिक प्यार

बोधकथा

केवल शारीरिक प्यार

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एक समय की बात है। एक युवा दम्पत्ति की नई-नई शादी हुई थी। सच बात तो यह है कि उन दोनों ने प्रेम विवाह रचाया था। शादी के कुछ दिन बाद ही दोनों एक पगडंडी से गुजर रहे थे कि तभी पति की नजर रास्ते पर पड़ी एक कांटेदार झाड़ी पर गई। उसने बड़े प्यार और उदारता के साथ अपनी पत्नी का हाथ थामकर उसे झाड़ी के ऊपर से कुदाया ताकि उसे कोई चोट नहीं पहुंचे।
‘‘इस संसार में कोई भी रिश्ता स्थायी नहीं है, यह निरंतर बदलता रहता है। केवल ईश्वर के साथ ही रिश्ती ही स्थायी है, जिसमें कभी कोई बदलाव नहीं आता। ईश्वर को अपना सच्चा मित्रा बनाओ।’’

कुछ सालों बाद एक दिन फिर दोनों उसी रास्ते से गुजरे। पति रास्ते भर अपने व्यापार और उसमें होने वाले लाभ को बढ़ाने के बारे में सोच रहा था। उसने अपनी पत्नी को पैसा बचाने की नसीहत भी दी। तभी फिर से उसकी नजर रास्ते पर पड़ी एक कांटेदार झाड़ी पर गई, पर इस बार उसने बिना प्यार-दुलार दिखाए अपनी पत्नी को इतना ही कहा, ‘ध्यान से… आगे एक कांटेदार झाड़ी पड़ी है।’

कुछ साल बीते और फिर एक दिन दोनों उसी रास्ते से गुजरे। हाल ही में उनकी बेटी की शादी तय हुई थी। रास्तेभर वह व्यक्ति शादी में होने वाले खर्च और दूसरे इंतजामों के बारे में सोच रहा था। वह अपने विचारों में इतना खोया हुआ था कि उसे अपनी पत्नी को रास्ते पर पड़ी कांटेदार झाड़ी के बारे में आगाह करना भी ध्यान नहीं रहा। उसकी पत्नी ने भी ध्यान नहीं दिया और उसका पैर उस झाड़ी पर पड़ गया। वह दर्द के मोर जोर से चिल्लाई। उस व्यक्ति ने गुस्से से झल्लाते हुए कहा, ‘तुम्हारी आंखे हैं या बटन! क्या देखकर नहीं चल सकती हो?’
कुछ सालों बाद एक दिन फिर दोनों उसी रास्ते से गुजरे। उसकी पत्नी किसी बात पर उसके साथ लगातार बहस कर रही थी और तभी अचानक उसकी नजर रास्ते पर पड़ी कांटेदार झाड़ी पर गई। पत्नी अपनी बकबक में इतनी खोई हुई थी कि उसने उस झाड़ी को नहीं देखा और तभी उस व्यक्ति ने मन ही मन सोचा, ‘मैं चाहता हूं काश एक बार इसका पैर इस झाड़ी पर पड़ ही जाए।’

‘‘अपने घर को एकता और मेलमिलाप का भंडारगृह बना दो। सुन्दरता को कोई महत्व नहीं है, अपितु एक सुन्दर इंसान होने की बात ही कुछ और है।’’

मनुष्य का प्रेम ऐसा ही है! यह सोचना कि पति-पत्नी के बीच जीवनभर प्यार का रिश्ता बना रहेगा और उसमें कभी कोई बदलाव नहीं आएगा, कपोल कल्पना और मिथ्या है और भगवान ने इस भ्रम के बारे में आगाह किया है। इस कहानी से अपने जीवन को जोड़कर आप भविष्य में अपने रिश्तों के संतुलन को पुनस्र्थापित कर सकते हैं। इस कहानी में आपको मनुष्य के वास्तविक स्वभाव की एक झलक मिलती है।

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