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समाज के तल में जाकर मोती तलाश लाए पद्म पुरस्कार वाले

सराहनीय

समाज के तल में जाकर मोती तलाश लाए पद्म पुरस्कार वाले

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इस बार के पद्म पुरस्कार देख कर ऐसा लग रहा है कि लंबे समय बाद निष्पक्षता और संजीदगी के साथ इन पुरस्कार के विजेताओं का चयन किया गया है। अभी तक अधिकांश पद्म पुरस्कार सत्ताधीशों की चाटुकारिता करने वाले लोगों की झोली में जाते रहे हैं। ऐसा नहीं है कि सभी सम्मान गलत हाथों में गए लेकिन उनमें से कुछ सिफारिशी और पक्षपातपूर्ण थे।

यही कारण है कि इस बार जब पद्म पुरस्कारों की घोषणा हुई तो उन पर सभी की नजरें थी। मीडिया के सामने इन पुरस्कारों की सूची आई तो बहुतों को आश्चर्य हुआ। कुछेक चेहरों को छोड़ दिया जाए तो अधिकांश समाज के तल में बैठे, गुमनामी के अंधेरे में खोए ऐसे लोग थे जो अपनी मेधा, परिश्रम और कला के बल पर अलग मुकाम तो बना पाए लेकिन उनके इन प्रयासों को सराहना कहीं से नहीं मिली।
जब पद्म पुरस्कार के लिए इन अनाम से गिने जाने वाले लोगों का नाम आया तो मन को संतोष मिला। इस सूची को देख कर कहा जा सकता है कि इसमें कहीं कोई राजनीति नहीं है और न ही इनमें से कोई नाम सिफारिशी है। यही कारण है कि इस बार पद्म पुरस्कार का स्तर बढ़ गया है और इस स्तर को बनाए रखने की चुनौती भी है।

यूं तो पद्म पुरस्कार में सभी नाम वंदनीय और सराहनीय हैं। किंतु जिन 14 महिलाओं को पद्म सम्मान के लिए चुना गया है उन्होंने अपने अपने क्षेत्रा में नई ऊंचाइयों को प्राप्त किया है। इनमें समाज सेवी हैं, योगा शिक्षक हैं, गायक हैं, लेखक भी हैं। बिहार की गायिका शारदा सिन्हा को उनके अद्भुत लोक गायन के लिए पद्मभूषण से सम्मानित किया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य की समस्या विकराल होती जा रही है, डाॅक्टर कमाई के लालच में शहरों की तरफ भागते हैं, लेकिन कुछ ऐसे भी हैं जो चिकित्सा को सेवा मानते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में रहकर मरीजों की सेवा में कार्य कर रहे हैं। डाॅ. रानी बांग और उनके पति अभय बांग महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले के आदिवासी क्षेत्रा में रहकर ग्रामीणों के बीच स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। बिना किसी लाभ की प्रत्याशा में यह दंपत्ति लगातार समाज सेवा में लगा हुआ है। इस दंपत्ति को पद्मश्री पुरस्कार प्रदान किया गया है। भारत्तलोन की दुनिया में सैखोम मीराबाई चानू का नाम जाना पहचाना है, उन्हें पद्म श्री प्रदान किया गया है। परंपरागत जड़ी बूटियों से इलाज करने वाली केरल की लक्ष्मी कुट्टी को सर्पदंश का इलाज करने के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया गया है। इसी तरह 67 वर्ष की कर्नाटक निवासी सुलागती नसम्मा को परंपरा गत प्रसव देखभाल के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया गया है। तमिल गायिका विजयलक्ष्मी नवनीत कृष्णा, नागालैंड की 84 वर्षीय गांधीवादी समाज सेवी लेटिना ठक्कर, देवदासी प्रथा के विरोध में लड़ने वाली और देवदासियों के पुनर्वास शिक्षा के लिए प्रयासरत कर्नाटक की सीतववा जोदती, सऊदी अरब की योग शिक्षक नोफ मारवाई, भारत की योग शिक्षा आगे बढ़ाने वाली 68 वर्षीय वी नानम्मल, मणिपुर की परंपरागत बुनाई कला को आगे बढ़ाने वाली सुबधनी देवी, शिक्षा और साहित्य के क्षेत्रा में कार्यरत जय श्री गोस्वामी महंत, अपनी कमाई से अस्पताल बनवाने वाली सुभाषिनी मिस्त्राी, उपन्यासकार मालती जोशी जैसी महिलाओं को पद्म सम्मान से सम्मानित किया गया है।

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