LOADING

Type to search

भाजपा फिर सरकार बनाएगी

साक्षात्कार थ्री

भाजपा फिर सरकार बनाएगी

Share

आपका विभाग जीवन की बुनियादी आवश्यकता जल से जुड़ा हुआ है इस दिशा में आपके विभाग ने क्या कार्य किए हैं, क्या कोई केंद्रीय योजना आई है मध्यप्रदेश में?

जल को लेकर हमारे विभाग में कोई केंद्रीय योजना नहीं आई है लेकिन फिर भी मध्यप्रदेश में राज्य स्तर पर प्रयास यह कर रहे हैं कि हर घर में कम से कम पानी की उपलब्धता रहे और पीने की पानी की परेशानी नहीं होना चाहिए, इस प्रयास में हमें सफलता भी मिली है।

केंद्र सरकार ने कई तरह की योजनाएं चलाई है। शुद्ध पेयजल की योजना, पानी को आर्सेनिक मुक्त करना, पानी की निकासी की योजना आदि?

यह योजनाएं हमारे यहाँ पहले से चल रही है।

केंद्र सरकार कह रही है कि इन योजनाओं को फंड केंद्र दे रहा है?

केंद्र दे रहा है लेकिन केंद्र के अलावा राज्य सरकार का भी इन योजनाओं में योगदान है। राज्य सरकार भी पैसे मिलती है और क्रियान्वयन किया जाता है। जहां-जहां आर्सेनिक पानी की समस्या है वहां पर हमने प्लांट लगवा दिए हैं।

कुछ जिले हैं जहां पानी में आर्सेनिक ज्यादा है, कुछ जिले हैं जहां पर पानी में प्रदूषण ज्यादा है, कुछ क्षेत्रों में पानी में लवणता ज्यादा है और कहीं पर पानी में लौह तत्व ज्यादा है इस समस्या का समाधान कैसे किया जा रहा है?

इन्हीं समस्याओं से निपटने के लिए वाटर फिल्ट्रेशन प्लांट लगा दिए गए हैं।

मप्र की लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की मंत्राी कुसुम मेहदेले ने कहा है 2022 तक हर घर पानी का लक्ष्य पूरा कर लिया जाएगा। उन्होंने मप्र में विपक्षी एकता को भाजपा के लिए चुनौती मानने से इनकार करते हुए कहा- भाजपा फिर सरकार बनाएगी…।

पेयजल की उपलब्धता के आपके विभागीय आंकड़ों के अनुसार मध्यप्रदेश में काफी काम हुआ है लेकिन फिर भी महिलाओं को पानी के लिए पैदल चलना पड़ता है ऐसा क्यों?

हां आपका कहना सही है, इसका कारण यह है कि पिछले वर्ष वर्षा नहीं हुई है और भूजल स्तर काफी नीचे चला गया है। जिसके कारण हम बोरिंग कराते हैं तो भी वह सफल नहीं होती। 500 से 700 फीट नीचे जा कर भी पानी नहीं मिलता है। इसलिए पानी की कमी के चलते महिलाओं को भटकना पड़ता है लेकिन फिर भी हमने उन गांवों में पानी का परिवहन करके समस्या पर नियंत्राण करने का प्रयास किया है। इस समस्या से निजात पाने के लिए प्रदेश के प्रत्येक कलेक्टर को 20-20 लाख रुपए दिए गए हैं, ताकि आपातकाल में पानी की समस्या आने पर आपूर्ति ना रुके और परिवहन के द्वारा पानी दिया जाए।

इससे एक सवाल यह भी पैदा होता है कि खरीदने पर तो पानी मिल रहा है क्योंकि आपने कलेक्टरों को 20-20 लाख रुपए दिए हैं।लेकिन वैसे क्यों नहीं मिल रहा है? पानी तो इंसान का बुनियादी अधिकार है। इससे कहीं ना कहीं यह प्रतीत होता है कि पानी की कमी नहीं है बल्कि वितरण की समस्या है?

अभी तो हमें कहीं पानी खरीदना नहीं पड़ा जो स्रोत हैं। उन्हीं से उपलब्ध कराया गया है। लेकिन यह अवश्य है कि स्रोत दूर होने की वजह से लोगों को पानी लाने ले जाने में कठिनाई है। इसके लिए टैंकर आदि से परिवहन में जो पैसा लगता है, वह सरकार द्वारा दिया जाता है। खरीदने जैसी कोई बात नहीं है।

जैसा कि आपने कहा कि भूजल स्तर काफी गिर रहा है, वर्षा सदैव एक सी नहीं होती लेकिन जब अधिक होती है तब पानी सहेजने के क्या इंतजाम किए गए हैं?

हम लोग वाटर हार्वेस्टिंग जैसे प्रयास कर रहे हैं लेकिन जनता के बीच इतनी जागरुकता ना होने के कारण प्रयास सफल नहीं हो पा रहे हैं। वाटर हार्वेस्टिंग के प्रति गांव देहात की जनता इतनी जागरुक नहीं है। गांव, देहात में उतने छत वाले मकान भी नहीं होते कि वाटर हार्वेस्टिंग की जा सके। इसलिए जिस स्तर पर सफलता मिलना चाहिए उतनी नहीं मिल रही है। इस काम के लिए हम जागरूकता अभियान फिर से चलाने पर विचार कर रहे हैं।

राजस्थान में राजेंद्र सिंह जी ने पानी के क्षेत्रा में अच्छा कार्य किया है। उन्होंने छोटे तालाब, बंध आदि बनाए हैं। उनके अनुभव का लाभ लेने का प्रयास आपके विभाग में नहीं किया?

राजेंद्र सिंह जी जल पुरुष कहलाते हैं उनसे मेरा परिचय है। वह अनेक अवसरों पर यहां पर आए भी हैं। हमारी सरकार भी इस दिशा में काम कर रही है। मुख्यमंत्राी जी ने बलराम तालाब गांव गांव में बनवाए हैं। गांव-गांव में कुआं खुदवाए गए हैं। इससे जलस्तर बढ़ा है और हम भी ऐसे प्रयास कर रहे हैं कि छोटे-छोटे तालाब, बांध बनाएं। एक अभियान यह भी चल रहा है कि पाइप लाइन के द्वारा सीधे लोगों के घर तक पानी पहुंचाया जाए। मालवा में अनेक घरों में नल से पानी आ रहा है। बुंदेलखंड में भी काम चल रहा है।

नल से पानी देने के लिए तो वितरण प्रणाली सही बनानी होगी ताकि पानी का अपव्यय भी ना हो, अन्यथा किसी को मिलेगा और किसी को नहीं मिलेगा?

यह तो जागरूकता की बात है। मनुष्य को खुद सोचना चाहिए कि दिन पर दिन पानी घटता जा रहा है उसका उपयोग हम बुद्धिमत्ता के साथ करें। जिससे कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी पानी उपलब्ध रहे। जहां तक उचित वितरण का प्रश्न है हमारा प्रयास है कि जैसे नर्मदा से हमने पानी लिया तो रास्ते में जितने भी गांव पड़ेंगे उन सब में हम पानी देते हुए आएंगे।

पानी के लिए ग्रामीण महिलाओं के भटकाव को रोकने और घर घर तक पानी पहुंचाने का लक्ष्य कब तक प्राप्त हो सकेगा?

हमारा लक्ष्य 2022 तक सभी को पानी देने का है। इस दिशा में प्रयास चल रहे हैं। अभी भी हमारे पास 5-6 माह हैं। दोबारा भी हमारी सरकार आ जाएगी। उस कार्य को हम आगे बढ़ाएंगे। उदाहरण के लिए पन्ना में मझगांव में एक सिंचाई परियोजना बन रही है, जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों को भी पानी मिलेगा और सिंचाई के लिए भी जल उपलब्ध होगा। इस तरह की योजनाएं सारे प्रदेश में बनाई जा रही हैं। अधिकांश नदी-तालाबों में पेयजल और सिंचाई की योजनाएं चलाई जा रही हैं।

मोदी सरकार के 4 वर्ष को आप किस दृष्टि से देखती हैं?

4 वर्ष बहुत ही प्रगति के रहे हैं बहुत से विकास के कार्य हुए हैं। प्रधानमंत्राी जी ने तो किया ही है मुख्यमंत्राी जी ने भी किया है। राज्य सरकार ने जन्म होने से लेकर वृद्धावस्था तक सहारे के लिए हर कार्य किया है। जीवन का कोई भी क्षेत्रा ऐसा नहीं छूटा है जिसमें भारत वासियों की प्रगति और बेहतरी के लिए कार्य ना किया गया हो। जीवन स्तर बढ़ाने, गरीबी हटाने, शिक्षा आदि के लिए बहुत काम हुआ है।

लेकिन कांग्रेस तो कहती है कि कुछ काम नहीं हुआ है?

ऐसा नहीं है। मध्यप्रदेश में ही तुलना करें तो 2003 के मुकाबले सड़कों में व्यापक सुधार हुआ है। 2003 में तो सड़कें ही नहीं थीं। बिजली घर-घर पहुंच चुकी है और कटौती भी न के बराबर होती है। शहर और गांव हर जगह पानी पहले से ज्यादा उपलब्ध है, अधिक जनसंख्या को मिल रहा है।

मध्य प्रदेश में चुनावी परिदृश्य पर आपकी क्या राय है?

भारतीय जनता पार्टी की सरकार फिर से बनेगी। प्रधानमंत्राी नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्राी शिवराज सिंह चैहान की लोकप्रियता अपार है। प्रधानमंत्राी के भय के कारण सारे विरोधी एकजुट हो चुके हैं, यही उनकी ताकत का प्रमाण है। पहले कभी ऐसा नहीं हुआ कि मायावती और सोनिया गांधी एक दूसरे के गले मिलें। विपक्ष की यह एकता ही भाजपा की लोकप्रियता का उदाहरण है। हमारी लोकप्रियता है, हम काम कर रहे हैं, हमारी स्वीकार्यता है जनमानस में, इसलिए अगला चुनाव भी हम ही जीतेंगे। जहां तक मध्य प्रदेश में विपक्षियों की एकता का प्रश्न है वह ऊपर से एक भले ही हो जाएं लेकिन जमीनी स्तर पर एक नहीं हो सकते क्योंकि उनका संगठन नहीं है। कांग्रेस और सारे दल मिलकर जो चुनौती दे रहे हैं उसको मैं कोई चुनौती नहीं मानती। मुख्यमंत्राी शिवराज सिंह चैहान की लोकप्रियता के बूते और हमारे द्वारा किए गए कार्य की बदौलत यह चुनाव हम फिर जीतेंगे।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *