LOADING

Type to search

15 साल विकास के जन-जन के विश्वास के

फोकस मध्यप्रदेश

15 साल विकास के जन-जन के विश्वास के

Share

मध्यप्रदेश के इतिहास में बीता डेढ़ दशक अभूतपूर्व विकास और सरकार में जनता के अटूट विश्वास का रहा है। डेढ़ दशक में मध्यप्रदेश विकास के प्रकाश पथ पर लगातार अग्रसर हुआ है।

मध्यप्रदेश की इन्हीं उपलब्धियां को देखकर, नया भारत गढ़ने वाले प्रधानमंत्राी श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि मध्यप्रदेश में भारत की अर्थव्यवस्था की ड्रायविंग फोर्स बनने की पूरी क्षमता है। भारत की अर्थव्यवस्था में वर्ष 2004-05 में मध्यप्रदेश का योगदान 3.48 प्रतिशत था, जो अब बढ़कर 3.84 प्रतिशत हो गया है। प्रदेश का सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) इस दौरान छह गुना से अधिक बढ़कर मात्रा 98 हजार करोड़ से 7 लाख 70 हजार करोड़ (अग्रिम अनुमान) हो गया है।

मुख्यमंत्राी श्री शिवराज सिंह चैहान ने कृषि को लाभ का व्यवसाय बनाने के काम को अपनी प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर रखा। फलस्वरूप मध्यप्रदेश की कृषि विकास दर 4 वर्ष से औसत 18 प्रतिशत है। प्रदेश को 5 बार लगातार कृषि कर्मण पुरस्कार मिला है। दलहन, तिलहन, चना, मसूर, सोयाबीन, अमरूद, टमाटर और लहसुन के उत्पादन में मध्यप्रदेश पूरे देश में सबसे अव्वल है। गेहूँ, अरहर, सरसों, आंवला, संतरा, मटर और धनिया के उत्पादन में मध्यप्रदेश का दूसरा नम्बर है। दूध के उत्पादन में मध्यप्रदेश भारत में तीसरे नम्बर पर है।

आज से 15 साल पहले मध्यप्रदेश में 24 घण्टे बिजली की उपलब्धता की बात सोचना भी शेखचिल्ली के सपने जैसा था। अब प्रदेश में अघोषित बिजली कटौती इतिहास की बात हो गई है। घरों में चैबीस घंटे और कृषि कार्य के लिए 10 घंटे बिजली मिल रही है। यह उपलब्धि इस अर्थ में और ज्यादा महत्व रखती है कि प्रदेश में वर्ष 2003 में बिजली उपभोक्ताओं की संख्या 64.40 लाख थी, जो अब बढ़कर 1 करोड़ 23 लाख 82 हजार हो गई है। प्रदेश में बिजली की उपलब्धता जो 2003 में मात्रा 5173 मेगावाॅट थी, अब बढ़कर 18364 मेगावाॅट हो गई है। मध्यप्रदेश में विद्युत अधोसंरचना के विकास पर बीते डेढ़ दशक में लगभग 84 हजार करोड़ रूपए का निवेश हुआ है।

अर्थव्यवस्था मज़बूत

बीते डेढ़ दशक में कुशल वित्तीय प्रबंधन के फलस्वरूप मध्यप्रदेश की अर्थव्यवस्था लगातार मजबूत हुई है। यह अब देश के एक नये इकानाॅमिक पावर हाउस के रूप में उभर रहा है।

डेढ़ दशक पहले प्रदेश के कुल राजस्व का 22.18 प्रतिशत ऋण का ब्याज चुकाने में खर्च होता था। अब यह घटकर केवल 8 प्रतिशत हो गया है।

राज्य का सकल घरेलू उत्पाद वर्ष 2004-05 में प्रचलित भावों पर 1,12,927 करोड़ था, जो अब बढ़कर 7,07,047 करोड़ रूपए हो गया है। यह वृद्धि 6 गुना से अधिक है।

राज्य के स्वयं के करों से प्राप्त राजस्व वर्ष 2004-05 में लगभग 6 हजार करोड़ की तुलना में बढ़कर अब 50 हजार करोड़ से अधिक हो गया है। राजकोषीय घाटा, राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन अधिनियम 2005 में निर्धारित सीमा के भीतर है।

प्रतिव्यक्ति आय 15 हजार 442 रूपये से पांच गुना बढ़कर 79 हजार 909 रूपये हो गई है।

पांचवी आर्थिक गणना 2005 की तुलना में उद्यमों में 27.07 और उद्यमों में काम करने वाले व्यक्तियों में 24.07 प्रतिशत वृद्धि हुई है।

लगभग 15 वर्ष पहले मध्यप्रदेश की सड़कें अपनी बदहाली के कारण देशभर में मजाक का विषय हुआ करती थीं। इसके विपरीत आज मध्यप्रदेश को बेहतर सड़कों के लिए जाना जाता है। इस दौरान प्रदेश में 1.50 लाख किलोमीटर सड़कों का निर्माण, सुधार और उन्नयन हुआ है। प्रधानमंत्राी ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत लगभग 70 हजार किलोमीटर सड़कें निर्माण कर मध्यप्रदेश पहले स्थान पर है। इन सड़कों के माध्यम से करीब 16 हजार गांव बारहमासी मुख्य सड़कों से जुड़ गये। इसके अलावा, मुख्यमंत्राी ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत 15 हजार किलोमीटर लम्बी सड़कों का निर्माण हुआ है। इन सड़कों के लगभग 6900 ऐसे गांव मुख्य सड़क से जुड़ गये हैं, जो प्रधानमंत्राी ग्राम सड़क योजनांतर्गत नहीं आते थे।

बीते लगभग 15 वर्ष में मध्यप्रदेश में औद्योगीकरण की गति काफी तेज हुई है। वर्ष 2016-17 में विनिर्माण उद्योग की विकास दर 7.38 प्रतिशत रही, जो अग्र्रिम अनुमानों के अनुसार वर्ष 2017-18 में 10.55 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। यह विकास दर राष्ट्रीय औसत से ज्यादा है।

मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण की योजनाओं के दक्ष क्रियान्वयन के फलस्वरूप प्रदेश में शिशु

मृत्यु दर 87 से घटकर 47 और मातृ मृत्युदर 398 से घटकर 221 रह गई है। सभी शासकीय स्वास्थ्य संस्थाओं में मुफ्त दवाएं और पैथालाॅजी जांच की सुविधा दी गई है। प्रदेश में स्थानीय निकायों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण सबसे पहले मध्यप्रदेश में दिया गया। जिसकी तुलना में आज प्रदेश में 53 प्रतिशत महिलाएं इन संस्थाओं में विभिन्न पदों पर कार्य करते हुए समाजसेवा का काम कर रही हैं। सरकार ने वन विभाग को छोड़कर सभी विभागों में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दिया है। संविदा शाला शिक्षकों के 50 प्रतिशत पद पहले से ही महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। बच्चियों पर बलात्कर के दोषियों को मौत की सजा का विधेयक मध्यप्रदेश ने बनाया। अब देश में यह कानून लागू हो गया है।

मध्यप्रदेश में स्वच्छ भारत अभियान के अंतर्गत अभी तक ग्रामीण क्षेत्रों में 60 लाख 50 हजार व्यक्तिगत शौचाल बनाये जा चुके हैं। साथ ही 21 हजार 791 गांवों को खुले में शौच की बुराई से मुक्त किया जा चुका है। शहरी क्षेत्रों में 5 लाख शौचालयों का निर्माण किया जा चुका है और शहरों को खुले में शौच से मुक्त किया गया है।

मध्यप्रदेश में शिक्षा के क्षेत्रा में गुणात्मक और संख्यात्क दोनों तरह का सुधार आया है। प्राथमिक स्तर पर ड्राप आउट रेट 15 प्रतिशत से घटकर 4.9 प्रतिशत और माध्यमिक स्तर पर 24.7 प्रतिशत से घटकर 6.7 प्रतिशत रह गया है। शिक्षा में अनुसूचित जाति और जनजाति के विद्यार्थियों की सहभागिता समाज के अन्य वर्गों के लगभग समकक्ष आ गई है।

प्रदेश में युवाओं को रोज़गार पाने के लिए अधिक योग्य बनाने के प्रयासों को गति और विस्तार दिया गया है।

गरीबों को खाद्यान्न सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश के 1 करोड़ 16 लाख 88 हजार गरीब परिवारों को 1 रूपए किलों गेहूँ और चावल दिया जा रहा है।

मध्यप्रदेश ने विभिन्न कार्यों में सूचना संचार प्रौद्योगिकी उपयोग की दिशा में बहुत तेजी से कदम बढ़ाये हैं। सरकारी अभिलेखों को डिजिटलाज्ड करने और दफ्तरों में काम को ज्यादा से ज्यादा इलेक्ट्राॅनिक मोड पर किया जा रहा है। सरकारी दफ्तरों केा यथासंभव पेपरलेस करने के प्रयास जारी हैं।

मध्यप्रदेश के भोपाल, जबलपुर, इंदौर, ग्वालियर, उज्जैन, सतना और सागर शहरों को स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में शामिल किया गया है।

मुख्यमंत्राी श्री शिवराज सिंह चैहान की पहल पर मध्यप्रदेश की जीवनरेखा नर्मदा नदी के संरक्षण के लिए नर्मदा सेवा यात्रा का आयोजन किया गया। यह विश्व का सबसे बड़ा नदी संरक्षण अभियान था। इसमें समाज के सभी वर्गों ने सक्रिय भागीदारी की। नर्मदा के प्रवाह को निरंतर बनाये रखने के लिए नदी के दोनों तटों पर 6 करोड़ 53 लाख पौधों का रोपण किया गया। नर्मदा के तट पर बसे शहरों का गंदा पानी नदी में न मिले, सके लिए अगले दो वर्ष में वहां सीवेज प्लांट लगाये जा रहे हैं।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *