LOADING

Type to search

पूर्व और पश्चिम की संस्कृति का अंतर जानें बच्चे दीपक जोशी (उच्च शिक्षा मंत्री, म.प्र.)

साक्षात्कार थ्री

पूर्व और पश्चिम की संस्कृति का अंतर जानें बच्चे दीपक जोशी (उच्च शिक्षा मंत्री, म.प्र.)

Share

’आजकल जो शिक्षा प्रणाली है, उसके तहत लोग प्राइवेट स्कूलों को प्राथमिकता देते हैं। इसकी एवज में वो मनचाही फीस वसूलते हैं। इस अनियंत्रित फीस पर नियंत्राण हेतु सरकार ने क्या कोई ठोस निर्णय लिया है?

म.प्र. में 2014 में शिवराज सरकार ने यह निर्णय लिया था। सरकार ने एक कानून बनाया, उस नीति के तहत अनावश्यक फीस की वसूली को सख्ती से रोका गया। कलेक्टर की अध्यक्षता में उसके आदेशानुसार ही 15 प्रतिशत ही फीस बढ़ा सकते हैं। इसके लिए प्रदेश स्तर की कमेटी का गठन कर निर्णय लिया जाता है।

कई बच्चे शासकीय स्कूल में वहाँ की सुविधाओं का लाभ लेने के लिये एडमिशन तो ले लेते हैं, किंतु पढ़ाई प्राइवेट स्कूल में ही करते हैं। ऐसी दोहरी प्रक्रिया न हो, इसके लिए सरकार ने क्या नियम बनाये हैं ?

अब तो आर.टी. के तहत रजिस्ट्रेशन होता है। डी.ओ. को भेजकर जाँच कराते हैं। जो बच्चा 5 किमी. के दायरे में रहता है, उसे ही एडमिशन मिलता है। इंटरनेट के माध्यम से पता चल जाता है कि इस बच्चे का आर.टी. के तहत रजिस्ट्रेशन व एडमिशन हो चुका है, इसलिए दोहरे एडमिशन का सिस्टम ही खत्म हो चुका है।

प्राइवेट स्कूल चलाने वाले कहीं भी असुविधाजनक क्षेत्रा में स्कूल खोल लेते हैं। वो जमीन भी उनकी अपनी नहीं होती, सरकार जब अतिक्रमण हटाती है तो वो स्कूल भी टूटते हैं, जिससे बच्चों का भविष्य भी प्रभावित होता है। इसके लिए सरकार ने कोई नियम निर्धारित किये हैं अथवा नहीं ?

कोई भी स्कूल खोलने के लिए दो बीघा जमीन होना जरुरी है। यदि स्कूल शहर के अंदर है तो उसे 3 साल की छूट दी गई है, उसके बाद उसका निजी स्कूल का भवन आवश्यक है ताकि बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ न हो सके।

पढ़ाई के साथ बच्चों को रोजगार से जोड़ने के लिये सरकार क्या उपाय कर रही है ?

आजकल मैकेनिकल शिक्षा पद्धति भी जुड़ी है। अब ज्ञान के साथ कौशल से भी बच्चों को रूबरू कराया जाता है। दसवीं की परीक्षा के बाद आई. टी. आई. भी रोजगार से जुड़ने का माध्यम है। बच्चा कौशल से जुड़ेगा तो छोटी-चीजें जैसे मोबाईल रिपेयरिंग, एग्रीकल्चर ट्रेंड, मिस्त्राी, पानी की बचत के उपाय आदि चीजें सीख सकता है, और पढ़ाई करते हुए भी पार्ट टाइम कार्य करके अपना खर्च भी निकाल सकता है।

कुछ वक्त से स्कूलों में बच्चों के साथ आपराधिक घटनाएं घटी हैं। ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए सरकार ने क्या उपाय किये हैं?

म.प्र. सरकार ने शासकीय अशासकीय सभी स्कूल व काॅलेजों में सी.सी.टी.वी. कैमरे लगवाने के निर्देश दिये हैं। बच्चों को ले जाने वाली बसों में भी कैमरे लगाने का आदेश दिया गया है। हर स्कूल के प्राचार्य को एक फाॅर्म दिया जाता है जिसे भरकर उसे पूरे महीने के स्कूल में लगे कैमरे की फुटेज की रिपोर्ट देनी पड़ेगी।

आज हम अपने देश में महिला सशक्तिकरण की बात करते हैं किंतु बहुत सी बच्चियाँ बाहर निकलते ही रेप का शिकार हो रही हैं। ऐसे हालात में क्या लड़कियां स्कूल या कोचिंग जाना छोड़ दें ?

इन घटनाओं से बचने के लिये बच्चियों में जागरूकता आवश्यक है। किसी भी समस्या के आने पर वह पुलिस हेल्प लाइन 100 का उपयोग करें। कोई भी खतरा देखकर अपने पेरेंट्स और इंटरनेट व ग्रुप में तुरंत मैसेज भेजें। अगर कोचिंग वगैरह में शाम को भी निकलना पड़े तो एक मैसेज पेरेंट्स को करें कि वह सुरक्षित पहुँच गई हैं। घर वापसी पर शिक्षक को भी सूचित करें। सभी पैरेंट्स को भी ये चाहिए कि वह लड़कियों को सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग दिलवाये ताकि वह शारीरिक और मानसिक रूप से वास्तव में सशक्त बन सकें।

आधार देश के बच्चों के लिए क्या संदेश देना चाहेंगे ?

हम विश्व गुरु कहलाने वाले भारत देश के निवासी हैं। पूर्व और पश्चिम की संस्कृति में क्या अंतर है ? यह बात हमारे देश के बच्चों को पता होनी चाहिये। हम लोग सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः। ऐसी पवित्रा धारणाओं में चलने वाले लोग हैं। बच्चे अपने जनक माता-पिता से बढ़कर किसी को न मानें। अपने परिवार से प्रेम के साथ सभी में देश-प्रेम की भावना भी विकसित हो, क्योंकि गुरु-ऋण, पितृ-ऋण, देव-ऋण के साथ मातृ-भूमि का ऋण भी हम सब पर है। जिसे चुकाने के लिए हम अपने विशेष कौशल का उपयोग कर सकते हैं। अपनी संस्कृति और कौशल के बल पर संपूर्ण विश्व में अपने देश के नाम का शंखनाद कर सकते हैं।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *