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मध्यप्रदेश में महिला सशक्तिकरण

सार्थक प्रयास

मध्यप्रदेश में महिला सशक्तिकरण

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प्रदेश में महिला सशक्तिकरण और उनके बेहतर पोषण के लिए प्रभावी कदम उठाये गये हैं। मध्यप्रदेश सरकार ने कुपोषण मिटाने हेतु चल रही पोषण आहार योजना जो कि वर्तमान में ठेकेदारों/कम्पनी द्वारा चलाई जा रही है, उसे महिला स्वयं सहायता समूहों को देने का निश्चय किया है। इस प्रस्तावित योजनांतर्गत क्लस्टर स्तर पर स्वयं सहायता समूहों के फेडरेशन द्वारा फैक्ट्री स्थापित की जायेगी, जिसमें राज्य शासन भूमि, आर्थिक सहायता तथा प्रबंधन में सहयोग करेगा।

मध्यप्रदेश सरकार महिला सशक्तिकरण को यथार्थ में बदलने में सफल रही है। लाडो अभियान से वर्ष 2016-17 में 322 बाल विवाह रोके गये। अभियान को प्रधानमंत्राी लोकसेवा उत्कृष्टता पुरस्कार और काॅमनवेल्थ अन्तर्राष्ट्रीय अवार्ड मिला है।

प्रदेश के 82 हजार से अधिक शौर्या दल महिलाओं के प्रति अनुकूल वातावरण निर्माण, उन्हें आत्म-निर्भर और सक्षम बनाने में सफल रहे हैं। शौर्या दल को राष्ट्रीय/अन्तर्राष्ट्रीय संस्थाओं ने सराहा है।

लाड़ली लक्ष्मी योजना का लाभ अब तक 27 लाख 70 हजार बालिकाओं को मिला है। इन बालिकाओं को 21 वर्ष की उम्र तक पहुंचने पर 1 लाख 18 हजार रुपये मिलेंगे, जो उनका भविष्य संवारने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेंगे। योजना की आवेदन प्रक्रिया को आसान बनाने ई-लाड़ली प्रारंभ किया गया है। इस शैक्षणिक सत्रा में कक्षा छठवीं में प्रवेश लेने वाली 67 हजार से अधिक बालिकाओं को प्रति बालिका दो हजार रुपये के मान से भुगतान किया गया है।

एक जुमला मात्रा नहीं है बल्कि महिलाओं को सही मायने में उनका हक दिलाया गया है। आज महिलाओं से जुड़े सारे सूचकांकों में प्रगति महिलाओं की बढ़ती ताकत का प्रतीक बन गई है।

तेजस्विनी ग्रामीण महिला सशक्तिकरण कार्यक्रम में साढ़े 16 हजार स्व-सहायता समूहों से 2 लाख 5 हजार महिलाओं को जोड़ा जा चुका है। मुख्यमंत्राी जी सामुदायिक नेतृृत्व क्षमता विकास कार्यक्रम में महिलाएं सामाजिक जवाबदारी का प्रशिक्षण ले रही हैं।

वन समितियों में महिलाओं के लिये 33 फीसदी स्थान आरक्षित किये गये हैं।

सभी प्रकार की हिंसा पीड़ित महिलाओं और बालिकाओं को एक ही जगह तत्काल आपातकालीन सुविधाएं उपलब्ध करवाने 18 जिलों में वन स्टाॅप सेंटर खोले गये हैं। इस वर्ष 8 जिलों-धार, हरदा, पन्ना, दतिया, खरगोन, शिवपुरी, सिवनी और विदिशा में भी ये सेंटर स्थापित किये जा रहे हैं।

महिला एवं बाल सुरक्षा हेतु समाज में जनचेतना और जागृति हेतु प्रदेश के सभी 1091 थानों में महिला-बाल विकास और गृह विभाग द्वारा ‘सम्मान, सुरक्षा एवं स्वरक्षा’ संवाद कार्यक्रम आयोजित किये गये हैं।

गत वर्ष महिला स्वास्थ्य शिविरों में 20 लाख 50 हजार महिलाएं लाभान्वित हुईं। इस वर्ष आठ मार्च से 30 मई तक पुनः यह शिविर लगाये जायेंगे।

पंजीकृत सतपुड़ा वुमेन सिल्क प्रोड्यूसर कम्पनी बैतूल में ग्यारह सौ से ज्यादा आदिवासी महिलाओं को रोजगार मिल रहा है। इस कम्पनी का संचालन पूर्णतया अनुसूचित जनजाति की महिलाओं द्वारा किया जा रहा है। महिलाओं या विधवा महिलाओं द्वारा यात्राी सेवाएं उपलब्ध कराने पर अनुज्ञा-पत्रा प्राप्त करने में वरीयता दी जा रही है। महिलाओं को निःशुल्क ड्रायविंग लाइसेंस दिये जा रहे हैं।

मुख्यमंत्राी कन्या विवाह-निकाह योजना में सवा चार लाख से ज्यादा कन्याओं के विवाह और साढ़े दस हजार कन्याओं के निकाह शासकीय सहायता से हुए हैं।

हमारे द्वारा इस वर्ष दण्ड विधि मध्यप्रदेश (संशोधन) विधेयक 2017 को पारिक कर 12 वर्ष तक की बालिकाओं से बलात्संग एवं सामूहिक बलात्संग के अपराध के लिये मत्युदंड तक का प्रावधान किया गया है। जिसे माननीय राष्ट्रपति महोदय ने पूरे देश में लागू कर मध्यप्रदेश की जनता की भावना का सम्मान किया है। गम्भीर अपराधों को चिन्हित कर माॅनीटरिंग की विशेष व्यवस्था बनाई गई है। गम्भीर अपराधों के 71 प्रतिशत प्रकरणों और महिला अपराधों के 1745 मामलों में सजा हुई है।

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