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करते नहीं बनी तो मौलाना ने की मारपीट

निंदनीय

करते नहीं बनी तो मौलाना ने की मारपीट

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तीन तलाक पर बहस अब हिंसक हो गई है। तीन तलाक और हलाला जैसी कुप्रथाओं के पक्षधर हताशा में मारपीट करने पर उतर आए हैं। बीते दिनों एक निजी टीवी चैनल पर सीधे प्रसारण के दौरान बहस कर रहे मौलाना एजाज अरशद कासमी ने शो में हिस्सा लेने आई वकील फराह फैज के साथ हाथापाई की। विजुअल में देखा जा सकता है कि किसी बात पर भड़क कर वकील फराह ने मौलाना के ऊपर हाथ उठा दिया, जिसके जवाब में मौलाना ने वकील की बुरी तरह धुनाई कर दी। दोनों का ही आचरण गलत है। किसी मुद्दे पर वैचारिक आदान-प्रदान तो उचित है, लेकिन हाथापाई की नौबत नहीं आनी चाहिए।

आजकल यह चलन बढ़ता ही जा रहा है। जिन लोगों के पास वैचारिकता और तार्किकता का अभाव है वह पशुवत आचरण करने लगे हैं। मौलाना चाहते तो सभ्यता दिखाते हुए उस प्रकरण के बाद गंभीर बने रह सकते थे। लेकिन उन्होंने भी वही किया, बल्कि उन्होंने तो कुछ ज्यादा ही पौरूष का प्रदर्शन कर दिया। कासमी कुछ समय पहले अंबर जैदी के साथ उसी शो में बदतमीजी कर चुके थे।

तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला कुछ दकियानूसी और पुरातनपंथी मनोवृति के कठमुल्लों को बर्दाश्त नहीं हो रहा है, इसी कारण वे अपना आपा खो बैठे हैं। यह लोग औरत को पैर की जूती समझते हैं, इनका मानना है कि जब जी में आए औरत को मौखिक तलाक देकर जिंदगी से बेदखल करना इनका जन्म सिद्ध अधिकार है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने इन कठमुल्लों की बौखलाहट कुछ ज्यादा ही बढ़ा दी है।

लेकिन यह कठमुल्लापन अकेले मुसलमानों तक सीमित नहीं है। हिंदू धर्म के ठेकेदार भी पीछे नहीं हैं। पिछले दिनों झारखंड में एक कार्यक्रम में पहुंचे वयोवृद्ध स्वामी अग्निवेश की कुछ ऐसे ही हिंदू कठमुल्लों ने पिटाई कर दी। पिटाई करने वाले अपने आप को कथित रूप से एक दल का सदस्य बता रहे हैं। यदि उस दल के सदस्यों का आचरण इस तरह कुत्सित और आपत्तिजनक है तो फिर भविष्य भी कांग्रेस की तरह अंधकारमय होने वाला है। स्वामी अग्निवेश के विचार और उनके सिद्धांत निहायत रूप से निकृष्ट और आलोचनात्मक हो सकते हैं लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि उनके जैसे वयोवृद्ध व्यक्ति की पिटाई की जाए। अग्निवेश जैसे दूषित मनोवृति के लोगों को जवाब देने के लिए जिस वैचारिक प्रखरता की आवश्यकता है उसकी कमी ऐसे संगठनों के पास नहीं है फिर यह कौन लोग हैं जो अग्निवेश को पीटकर तमाम संगठनों को बदनाम करने पर तुले हुए हैं। झारखंड के मुख्यमंत्राी ने तुरंत कार्यवाही करते हुए इस घटना की जांच का आदेश दिया है। लेकिन ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जरूरी है कि राजनीतिक दल अपने नौजवान कार्यकर्ताओं का उचित मार्गदर्शन करें। उन्हें यह बताएं कि जो सिद्धांत और विचार अपने आप में सशक्त होता है उसे स्थापित करने के लिए हाथ-पैरों की आवश्यकता नहीं होती। उन्हें यह भी बताया जाना चाहिए कि बहस और तार्किकता का जवाब वैचारिक स्तर पर ही दिया जाना उचित  है। मारपीट करके इस तरह के संगठनों को अंततः नुकसान ही पहुंचाया जाता है।

हलाला की हवस में बेटी समान बहू को भी नहीं बख्शा

सुप्रीम कोर्ट ने भले ही तीन तलाक को अमान्य घोषित कर दिया हो, लेकिन हलाला की हवस में समाज के एक तबके ने इसे अभी भी जारी रखा हुआ है। यह हवस इतनी ज्यादा है कि ससुर अपनी ही बहू का हलाला करने के लिए उस से बलात्कार तक कर डालता है। उत्तर प्रदेश के बरेली में एक ऐसा ही घिनौना प्रकरण सामने आया है। यहां पर एक महिला को पहले तो उसके पति ने तीन बार तलाक देकर अपनी जिंदगी से बेदखल कर दिया और बाद में जब फिर से अपनाने का सवाल खड़ा हुआ तो महिला का उसके ससुर ने हलाला की आड़ में बलात्कार कर डाला। ऐसा एक बार नहीं अनेक बार हुआ। हद तो तब हो गई जब तीसरी बार तलाक देकर महिला को अपने ही देवर के साथ हलाला की रस्म निभाने के लिए कहा गया। हलाला के नाम पर बार-बार दुष्कर्म की शिकार हुई महिला अंततः पुलिस की शरण में गई और उसे न्याय दिलाने के लिए पुलिस ने ससुर पर बलात्कार का मुकदमा कायम किया। महिला के पति पर भी अप्राकृतिक सेक्स करने का मामला कायम किया गया है। परिवार के अन्य सदस्यों पर उत्पीड़न तथा अन्य धाराओं में केस दर्ज किया है।

पीड़ित महिला की जुलाई 2009 में शादी हुई थी।

महिला के अनुसार ‘चूंकि मैं बच्चे को जन्म नहीं दे सकी, इसलिए मेरे पति और ससुराल वालों ने मुझे प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। 15 फरवरी 2011 को पति ने मुझे तीन तलाक दे दिया। इसके बाद पति और ससुराल वालों ने मुझे ससुर के साथ निकाह हलाला करने के लिए कहा। जब मैंने मना कर दिया तो उन्होंने मेरी पिटाई की और भूखा रखा। मुझे नशे के इंजेक्शन देने शुरू कर दिए।’

पीड़िता ने बताया, ‘1 जुलाई को मुझे ससुर के साथ निकाह के लिए मजबूर कर दिया। 10 दिन बाद तीन तलाक देने से पहले ससुर ने मेरे साथ कई बार बलात्कार किया। नवंबर 2011 में मेरी मेरे पति से दोबार शादी हो गई लेकिन मेरा ससुर लगातार मेरे साथ दरिंदगी करता रहा। ऐसा करते-करते छह साल बीत गए। 4 जनवरी 2017 को मेरे पति ने मुझे दोबारा तीन तलाक दे दिया।’

पति के इस कदम से परेशान होकर निकाह हलाला पीड़िता ने फरवरी 2017 में पुलिस में एक शिकायत दर्ज कराई लेकिन सामाजिक बदनामी के डर से उसमें बलात्कार का जिक्र नहीं किया। इसके बाद ससुराल वालों ने कहा कि वह अपने देवर के साथ निकाह कर ले लेकिन महिला ने ऐसा करने से इनकार कर दिया।

महिला ने कहा, ‘दूसरे तीन तलाक के बाद मेरे पति ने मुझे तीन दिनों तक एक कमरे में बंद करके भूखा रखा। वह चाहता था कि मैं उसके छोटे भाई के साथ निकाह हलाला करूं। वह मुझे मौत की धमकी देता था।’ सवाल यह है कि इस तरह की घटनाओं के बाद भी वे कौन लोग हैं जो तीन तलाक, हलाला जैसी कुरीतियों का समर्थन कर रहे हैं।

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