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शारदा और मोर

कहानी बोधकथा

शारदा और मोर

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शारदा देवताओं की रानी थीं। वैसी रूपवती दूसरी देवी नहीं थी। उनकी प्यारी चिड़िया मोर था। खुशनुमा परों और भारी-भरकम आकार के कारण वह देवताओं की रानी सरस्वती का वाहन होने लायक था।
कुछ हो, एक दिन मोर ने मन में सोचा, मेरे साथ बड़ा बुरा बर्ताव किया गया है। मुझे वैसी अच्छी आवाज नहीं दी गयी जैसे कोयल को, नहीं तो रूप के अनुरूप ही मेरा स्वर होता। उसने शारदा से कोयल की-सी आवाज माँगी।
देवी ने उसकी विनय पर यह उत्तर दिया- हर चिड़िया को उसके योग्य दान मिला है। कोयल काली और सीधी चिड़िया है। उसको मधुर स्वर मिला। तुम्हारी आवाज तीखी और दिल को वैसी लुभाने वाली नहीं, मगर तुम्हारे पर इतने सुन्दर हैं कि देखकर दूसरों को जलन होती है। तुम्हें जो कुछ मिला है, उसके लिए कृतज्ञ रहो। जो तुम्हें नहीं मिल सकता, उसके लिए हाथ न बढ़ाओ। अपने भाग्य से सन्तोष रखना सीखो।


मियां शेख चिल्ली चले लकड़ीयां काटने


एक बार मियां शेख चिल्ली अपने मित्रा के साथ जंगल में लकड़ियाँ कांटने गए। एक बड़ा सा पेड़ देख कर वह दोनों दोस्त उस पर लकड़ियाँ काटने के लिए चढ़ गए। मियां शेख चिल्ली अब लकड़ियाँ काटते-काटते लगे अपनी सोच के घोड़े दौड़ने। उन्होने सोचा कि मै इस जंगल से ढेर सारी लकड़ियाँ काटूँगा। उन लकड़ियों को बाजार में अच्छे दामों में बेचूंगा। इस तरह मुझे काफी धन-लाभ होगा।
इस काम से मै कुछ ही समय में अमीर बन जाऊंगा। फिर लकड़ियाँ काटने के लिए ढेर सारे नौकर रख लूँगा। काटी हुई लकड़ियों से फर्नीचर का बिजनस शुरू करूंगा। कुछ ही दिनों में मै इतना समृद्ध व्यापारी बन जाऊंगा की नगर का राजा मुझ से राजकुमारी का विवाह करवाने के लिए खुद सामने से राजी हो जाएगा।शादी के बाद हम घूमने जायेंगे और एक सुन्दर सी बागीचे में राजकुमारी अपना हाथ मेरी तरफ बढ़ाएंगी। खयालों में खोये हुए मियां शेख चिल्ली ऐसा सोचते-सोचते पेड़ की डाल छोड़ कर सचमुच राजकुमारी का हाथ थामने के लिए अपने हाथ आगे बढाने लगते हैं३तभी अचानक उनका संतुलन बिगड़ जाता है और वो धड़ाम से नीचे जमीन पर गिर पड़ते है। ऊंचाई से गिरने पर मियां शेख चिल्ली के पैर की हड्डी टूट जाती है। और साथ-साथ उनके बिना सिर-पैर के खयाली सपनें भी टूट कर बिखर जाते हैं।

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